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      ****  ठण्डी के दिन****
   

        अरे भाइयों ठण्डी आई । बच्चे तो क्रिकेट मे । बूढ़े तो बूढ़े जवान भी बठुर गये । अलाव कब तक । आलू पर पाला ।
कुहरे मे । कुहासा मे ।

     सभी टकटकी लगाये  हैं । सूर्य निकले । पर सूर्यदेव डरे हैं । सरमा रहे हैं  हाय रे मानव ।स्वार्थी  ! फिर छिप गए ।
वे भी लुकाछिपी खेल रहे है ।

     इधर बेरोजगारो के सूर्य । दिखता छिप जाता ।इधर भागों उधर भागों । यह प्रमाण वह प्रमाण । इधर भर्ती उधर भर्ती  निरस्त । पर्चा आउट । फिर भागमभाग ।


        हाय रे बेरोजगारी !!! तू तो हो गयी सरकारी । हजार का फण्डा । पर अपना ही झण्डा । तुम्हारे नाम पर न जाने कितनों ने कितनों की मारी । और तुम तो कर रही हो सवारी गरीबों पर ।।

      पहले लोग डरते थे । जानवर से । दुष्टों से । अब लोग उठकर सुबह पूजा करते हैं ।। हाय रे बेरोजगारी तुम न आना । कभी न आना ।सपने में भी ।।।।

                        धन्यवाद  !!!

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