рд░рд╡िрд╡ाрд░, 6 рдЕрдк्рд░ैрд▓ 2014

*рдУрдЯ рдФрд░ рдЪोрдЯ*

             *ओट और चोट*

संता- क्यों बंता अबकी किसको ओट कर रहे हो ?
बंता--अरे अबकी तो सब नमो नमो अहै , भाजपा के लहर बा ।
संता--जो बेरोजगारी भत्ता लिये ,लैपटाप लिये ,साईकल लिये, यही नहीं कन्या विद्या धन जो लिये उसका क्या ?

बंता--ईतो लालच था ,तबौ काफ़ी कुछ तो केहेन अहा ।पर जनता के मन कुछू औरै हैं । कुछ नया ।
संता-- तुम्हारा मतलब लुभावने विकास की अपेक्षा सुदृढ़ शख्सियत की आवश्यकता काफ़ी मायने रखती हैं ।

बंता --और ईहै लोगों के उम्मीद की अन्तिम किरण अहै । फिर कभौ यैसेन लहर न आ सकी । चुनाव मे ।
संता--देखते हैं दिलो को जीत लेने वाले मोदी पहले से लगे हुये गरीबी और भ्रष्टाचार के जख्मों पर कितना असरदार मरहम लगाते हैं ।। नमो  नमो ।।

рд╢рдиिрд╡ाрд░, 15 рдоाрд░्рдЪ 2014

*рд╣ोрд▓ी рдХा рджिрди*

        होली का दिन । वाह ! रंग और गुलाल । सब जुट गये हैं ,अपने अपने पसन्द के रंग ढूँढने । और ब्यंग रूपी पिचकारी तान लिये हैं । ढूंढ रहे हैं ।कोई तो बलि का बकरा बने ।।

       हमारे समाज के रंग ।।बिना  होली के ही सबके सब भीगे हुये हैं ।उदासी का रंग । हँसी का रंग ।सच्चाई का रंग । ईमानदारी का रंग ।बेईमानी का रंग । होली तो सब खेल रहे हैं।।

        और यही नहीं जो ईमानदारी का चोला पहने हैं ।उनकी पिचकारी थोड़ी छोटी हैं ।। और जो बचे हैं गुलालों से काम चला ले रहे है ।।

      रंगों के छींटे बदरंगी समाज पर फैल रहा हैं । सभी बेरंग होना चाहते हैं ।और इसीलिये जुआड रूपी काली चादर ओढ़ लिये हैं ।।

     उधर अमीरी का रंग । गरीबी का रंग अलग राग अलाप रहा हैं ।। बदल रहा हैं ।दल बदलू सरकार की तरह  । आप भी सावधान रहिए । इस होली में ।।

                     धन्यवाद

рд╢рдиिрд╡ाрд░, 15 рдл़рд░рд╡рд░ी 2014

*рд╡ेрд▓ेрди्рдЯाрдЗрди рдбे *

            *वेलेन्टाइन डे *

          आज हैं 14फरवरी । कुछ समझ मे आया । प्रेम दिवस । बचकर रहना । आजकल  जानवर भी प्रेम दिवस मना रहे हैं । उधर संता को एक भैंस फूल दे गयी ।

          अब यही बचा है ।भैंस और कुत्ते ही बचे हैं । हमारे पडोस मे तो कनेर का फूल देकर वेलेन्टाइन मना लिया । और यही नही । कुछ कद्दू के फूलों को ढूंढॅ रहे थे ।

    रिस्ता हैं गहरा । देखते हैं चेहरा । दिल पर हैं पहरा । बना रहे हैं मोहरा । और लड़कियां डर रही हैं । कहीं कोई उन्हें फूल न दे दे ।

         खैर जाने दो । प्यार की परिभाषा बनने दो ।पर तुम सावधान रहो कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी और का दिया फूल पा जाओ जो किसी और ने किसी और को दिया था ।

         ------–-धन्यवाद

рд╢ुрдХ्рд░рд╡ाрд░, 7 рдл़рд░рд╡рд░ी 2014

******рдмुреЭाрдкा*****

              **बुढ़ापा**

        क्या समय हैं ।हर तरफ प्रलय हैं। अत्याचार! अत्याचार !! वही अलाप । प्रेम प्रलाप । बुढऊ को भी नहीं नहीं छोडते ।क्यों छोड़े ।आखिर वे भी तो अपनी उम्र की लाज नहीं कर रहे ।

          एक तरफ कमर मे दर्द । ऊपर से तबियत सर्द । कराह रहे हैं । कँपकँपी मे हैं । दूसरी तरफ टपक रही हैं । ललचा रहे हैं। वाह रे बुढ़ापा !!!

           उनकी भी क्या गलती । उम्र ही तो ढलती । अपनी जवानी मे नहीं देख पायें झरोखा ।। समय ने

दिया धोखा । और यह कटपीस । तंग कपड़े ।झलकते जिस्म । उभरते जिस्म ।

                और आँखें ही तो हैं ।। उनकी क्या गलती ।चाहे तुम्हारी हो या हमारी । वे तो जान ही लेती हैं आँखों का इरादा ।

  ----------------- धन्यवाद

********рдардг्рдбी рдХे рджिрди*******


      ****  ठण्डी के दिन****
   

        अरे भाइयों ठण्डी आई । बच्चे तो क्रिकेट मे । बूढ़े तो बूढ़े जवान भी बठुर गये । अलाव कब तक । आलू पर पाला ।
कुहरे मे । कुहासा मे ।

     सभी टकटकी लगाये  हैं । सूर्य निकले । पर सूर्यदेव डरे हैं । सरमा रहे हैं  हाय रे मानव ।स्वार्थी  ! फिर छिप गए ।
वे भी लुकाछिपी खेल रहे है ।

     इधर बेरोजगारो के सूर्य । दिखता छिप जाता ।इधर भागों उधर भागों । यह प्रमाण वह प्रमाण । इधर भर्ती उधर भर्ती  निरस्त । पर्चा आउट । फिर भागमभाग ।


        हाय रे बेरोजगारी !!! तू तो हो गयी सरकारी । हजार का फण्डा । पर अपना ही झण्डा । तुम्हारे नाम पर न जाने कितनों ने कितनों की मारी । और तुम तो कर रही हो सवारी गरीबों पर ।।

      पहले लोग डरते थे । जानवर से । दुष्टों से । अब लोग उठकर सुबह पूजा करते हैं ।। हाय रे बेरोजगारी तुम न आना । कभी न आना ।सपने में भी ।।।।

                        धन्यवाद  !!!

рдЧुрд░ुрд╡ाрд░, 6 рдл़рд░рд╡рд░ी 2014

*****рдЙрдо्рд░ рдПрдХ рд░ाрд╕्рддा*****

        !****उम्र एक रास्ता ****!

      उम्र एक ठहराव हैं और जीवन एक  रास्ता हैं ,एक पगडण्डी हैं,  हमें तय करना हैं मंजिल को  मॄत्यु को । चलना तो पडेगा । चाहे स्लो चाहे फास्ट ।

       टाइम हैं पथ प्रदर्शक । उसी के साथ चलना  हैं ,हमको और तुमको भी ।
और प्रकृति की चुनौतियों को भी करना हैं स्वीकार जो हम सबका हैं अधिकार ।

         शरीर तय करता हैं दूरी ,चाहे चाहत रहे अधूरी ,या हो कोई मजबूरी
तन की ,मन की ।।

      और एक दिन मिट जायेगा फासला
रखना हैं सबको हौसला । चाहे हो बुरा चाहे हो भला  ।क्योंकि उम्र तो हैं एक पडाव जबकि मॄत्यु हैं अन्तिम ठहराव ।।
                                 धन्यवाद

; *****рдЖрд▓ू рдХी рдЦेрддी*****

      ****आलू की खेती****

       आसान नहीं अब आलू की खेती । संता ने कहा मेहनत हैं लेतीं ।पर कुछ भी न देती ।उधर जंगली सुअरों का ताँता।
इधर नीलगायों से नाता । हाय !रे किसान लागत भी न निकली ।ऊपर से बरसात का आना ।।

       अब तो आलू नही आलूबुखारा बोना होगा । पर निमोना कैसे बनेगा । खाना हैं तो बनाना होगा ।कुछ करना तो होगा । आखिर काली दाल कब तक ।

        सब ओर लोग भागे जा रहे हैं । कुछेक आलू के साथ तो कुछ ने छर्रिओ को भी नहीं छोड़ा । पगडण्डियों पर फिसलने की भी चिन्ता नही । आखिर एकाध तो पाये ।

            सुअरें भी सरमा रही हैं । किसानों की दुर्दशा पर  । फिर भी झूठी उम्मीदे हर आने वाली सरकार से लगाये हैं ।।सोच रहे हैं राशन तो मिल ही रहा हैं  । आलू और प्याज वाली सरकार कब आयेगी ।।

         धन्यवाद !