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      ****आलू की खेती****

       आसान नहीं अब आलू की खेती । संता ने कहा मेहनत हैं लेतीं ।पर कुछ भी न देती ।उधर जंगली सुअरों का ताँता।
इधर नीलगायों से नाता । हाय !रे किसान लागत भी न निकली ।ऊपर से बरसात का आना ।।

       अब तो आलू नही आलूबुखारा बोना होगा । पर निमोना कैसे बनेगा । खाना हैं तो बनाना होगा ।कुछ करना तो होगा । आखिर काली दाल कब तक ।

        सब ओर लोग भागे जा रहे हैं । कुछेक आलू के साथ तो कुछ ने छर्रिओ को भी नहीं छोड़ा । पगडण्डियों पर फिसलने की भी चिन्ता नही । आखिर एकाध तो पाये ।

            सुअरें भी सरमा रही हैं । किसानों की दुर्दशा पर  । फिर भी झूठी उम्मीदे हर आने वाली सरकार से लगाये हैं ।।सोच रहे हैं राशन तो मिल ही रहा हैं  । आलू और प्याज वाली सरकार कब आयेगी ।।

         धन्यवाद !

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