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              **बुढ़ापा**

        क्या समय हैं ।हर तरफ प्रलय हैं। अत्याचार! अत्याचार !! वही अलाप । प्रेम प्रलाप । बुढऊ को भी नहीं नहीं छोडते ।क्यों छोड़े ।आखिर वे भी तो अपनी उम्र की लाज नहीं कर रहे ।

          एक तरफ कमर मे दर्द । ऊपर से तबियत सर्द । कराह रहे हैं । कँपकँपी मे हैं । दूसरी तरफ टपक रही हैं । ललचा रहे हैं। वाह रे बुढ़ापा !!!

           उनकी भी क्या गलती । उम्र ही तो ढलती । अपनी जवानी मे नहीं देख पायें झरोखा ।। समय ने

दिया धोखा । और यह कटपीस । तंग कपड़े ।झलकते जिस्म । उभरते जिस्म ।

                और आँखें ही तो हैं ।। उनकी क्या गलती ।चाहे तुम्हारी हो या हमारी । वे तो जान ही लेती हैं आँखों का इरादा ।

  ----------------- धन्यवाद

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