рд╢рдиिрд╡ाрд░, 15 рдл़рд░рд╡рд░ी 2014

*рд╡ेрд▓ेрди्рдЯाрдЗрди рдбे *

            *वेलेन्टाइन डे *

          आज हैं 14फरवरी । कुछ समझ मे आया । प्रेम दिवस । बचकर रहना । आजकल  जानवर भी प्रेम दिवस मना रहे हैं । उधर संता को एक भैंस फूल दे गयी ।

          अब यही बचा है ।भैंस और कुत्ते ही बचे हैं । हमारे पडोस मे तो कनेर का फूल देकर वेलेन्टाइन मना लिया । और यही नही । कुछ कद्दू के फूलों को ढूंढॅ रहे थे ।

    रिस्ता हैं गहरा । देखते हैं चेहरा । दिल पर हैं पहरा । बना रहे हैं मोहरा । और लड़कियां डर रही हैं । कहीं कोई उन्हें फूल न दे दे ।

         खैर जाने दो । प्यार की परिभाषा बनने दो ।पर तुम सावधान रहो कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी और का दिया फूल पा जाओ जो किसी और ने किसी और को दिया था ।

         ------–-धन्यवाद

рд╢ुрдХ्рд░рд╡ाрд░, 7 рдл़рд░рд╡рд░ी 2014

******рдмुреЭाрдкा*****

              **बुढ़ापा**

        क्या समय हैं ।हर तरफ प्रलय हैं। अत्याचार! अत्याचार !! वही अलाप । प्रेम प्रलाप । बुढऊ को भी नहीं नहीं छोडते ।क्यों छोड़े ।आखिर वे भी तो अपनी उम्र की लाज नहीं कर रहे ।

          एक तरफ कमर मे दर्द । ऊपर से तबियत सर्द । कराह रहे हैं । कँपकँपी मे हैं । दूसरी तरफ टपक रही हैं । ललचा रहे हैं। वाह रे बुढ़ापा !!!

           उनकी भी क्या गलती । उम्र ही तो ढलती । अपनी जवानी मे नहीं देख पायें झरोखा ।। समय ने

दिया धोखा । और यह कटपीस । तंग कपड़े ।झलकते जिस्म । उभरते जिस्म ।

                और आँखें ही तो हैं ।। उनकी क्या गलती ।चाहे तुम्हारी हो या हमारी । वे तो जान ही लेती हैं आँखों का इरादा ।

  ----------------- धन्यवाद

********рдардг्рдбी рдХे рджिрди*******


      ****  ठण्डी के दिन****
   

        अरे भाइयों ठण्डी आई । बच्चे तो क्रिकेट मे । बूढ़े तो बूढ़े जवान भी बठुर गये । अलाव कब तक । आलू पर पाला ।
कुहरे मे । कुहासा मे ।

     सभी टकटकी लगाये  हैं । सूर्य निकले । पर सूर्यदेव डरे हैं । सरमा रहे हैं  हाय रे मानव ।स्वार्थी  ! फिर छिप गए ।
वे भी लुकाछिपी खेल रहे है ।

     इधर बेरोजगारो के सूर्य । दिखता छिप जाता ।इधर भागों उधर भागों । यह प्रमाण वह प्रमाण । इधर भर्ती उधर भर्ती  निरस्त । पर्चा आउट । फिर भागमभाग ।


        हाय रे बेरोजगारी !!! तू तो हो गयी सरकारी । हजार का फण्डा । पर अपना ही झण्डा । तुम्हारे नाम पर न जाने कितनों ने कितनों की मारी । और तुम तो कर रही हो सवारी गरीबों पर ।।

      पहले लोग डरते थे । जानवर से । दुष्टों से । अब लोग उठकर सुबह पूजा करते हैं ।। हाय रे बेरोजगारी तुम न आना । कभी न आना ।सपने में भी ।।।।

                        धन्यवाद  !!!

рдЧुрд░ुрд╡ाрд░, 6 рдл़рд░рд╡рд░ी 2014

*****рдЙрдо्рд░ рдПрдХ рд░ाрд╕्рддा*****

        !****उम्र एक रास्ता ****!

      उम्र एक ठहराव हैं और जीवन एक  रास्ता हैं ,एक पगडण्डी हैं,  हमें तय करना हैं मंजिल को  मॄत्यु को । चलना तो पडेगा । चाहे स्लो चाहे फास्ट ।

       टाइम हैं पथ प्रदर्शक । उसी के साथ चलना  हैं ,हमको और तुमको भी ।
और प्रकृति की चुनौतियों को भी करना हैं स्वीकार जो हम सबका हैं अधिकार ।

         शरीर तय करता हैं दूरी ,चाहे चाहत रहे अधूरी ,या हो कोई मजबूरी
तन की ,मन की ।।

      और एक दिन मिट जायेगा फासला
रखना हैं सबको हौसला । चाहे हो बुरा चाहे हो भला  ।क्योंकि उम्र तो हैं एक पडाव जबकि मॄत्यु हैं अन्तिम ठहराव ।।
                                 धन्यवाद

; *****рдЖрд▓ू рдХी рдЦेрддी*****

      ****आलू की खेती****

       आसान नहीं अब आलू की खेती । संता ने कहा मेहनत हैं लेतीं ।पर कुछ भी न देती ।उधर जंगली सुअरों का ताँता।
इधर नीलगायों से नाता । हाय !रे किसान लागत भी न निकली ।ऊपर से बरसात का आना ।।

       अब तो आलू नही आलूबुखारा बोना होगा । पर निमोना कैसे बनेगा । खाना हैं तो बनाना होगा ।कुछ करना तो होगा । आखिर काली दाल कब तक ।

        सब ओर लोग भागे जा रहे हैं । कुछेक आलू के साथ तो कुछ ने छर्रिओ को भी नहीं छोड़ा । पगडण्डियों पर फिसलने की भी चिन्ता नही । आखिर एकाध तो पाये ।

            सुअरें भी सरमा रही हैं । किसानों की दुर्दशा पर  । फिर भी झूठी उम्मीदे हर आने वाली सरकार से लगाये हैं ।।सोच रहे हैं राशन तो मिल ही रहा हैं  । आलू और प्याज वाली सरकार कब आयेगी ।।

         धन्यवाद !